पाठ्यक्रम: GS2/अंतर्राष्ट्रीय संबंध
समाचार में
- भारतीय रक्षा मंत्री की सियोल यात्रा, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के बाद, भारत–दक्षिण कोरिया संबंधों की बढ़ती शक्ति और रणनीतिक महत्त्व को रेखांकित करती है।
पृष्ठभूमि
- कोरियाई युद्ध में भारत की भूमिका: 1945 के बाद और कोरियाई युद्ध के दौरान भारत ने कोरिया में महत्त्वपूर्ण राजनयिक एवं मानवीय भूमिका निभाई। युद्ध के दौरान भारत ने 60वीं पैराशूट फील्ड एम्बुलेंस (627 चिकित्सा कर्मी) भेजी, जिन्होंने लगभग 2,20,000 रोगियों का उपचार किया।
- भारत ने संयुक्त राष्ट्र का युद्धविराम प्रस्ताव भी प्रायोजित किया, जिसके परिणामस्वरूप 1953 का युद्धविराम समझौता हुआ।
- राजनयिक संबंधों की शुरुआत: भारत और दक्षिण कोरिया ने 1962 में वाणिज्य दूतावास संबंध स्थापित किए तथा 1973 में औपचारिक राजनयिक संबंध बनाए।
- समय के साथ संबंध बेहतर हुए और दोनों देशों ने 2010 में रणनीतिक साझेदारी तथा 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सियोल यात्रा के दौरान विशेष रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया।
सहयोग के क्षेत्र
- व्यापार और आर्थिक संबंध: भारत–ROK व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) 2010 से लागू है, जिसने द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को सुदृढ़ किया।
- CEPA लागू होने पर द्विपक्षीय व्यापार USD 14.2 बिलियन था, जो 2024–25 में बढ़कर USD 26.89 बिलियन हो गया, लगभग 90% की वृद्धि।
- भारत के प्रमुख निर्यात: हल्के तेल और संबंधित उत्पाद, एल्यूमिनियम (गैर-मिश्रित), फेरो-क्रोमियम, परिष्कृत सीसा, खनिज ईंधन डिस्टिलेट (मुख्यतः नैफ्था), अनाज, और लोहे-इस्पात के उत्पाद।
- प्रमुख आयात: ऑटोमोबाइल पुर्जे, दूरसंचार उपकरण, हॉट-रोल्ड आयरन उत्पाद, परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पाद, आधार स्नेहक तेल, यांत्रिक उपकरण, विद्युत मशीनरी और पुर्जे, तथा लोहे-इस्पात के उत्पाद।
- ROK भारत का 13वाँ सबसे बड़ा FDI निवेशक है, जिसने 2000 से अब तक USD 6.91 बिलियन का निवेश किया है।
- CEPA लागू होने पर द्विपक्षीय व्यापार USD 14.2 बिलियन था, जो 2024–25 में बढ़कर USD 26.89 बिलियन हो गया, लगभग 90% की वृद्धि।
- रक्षा संबंध: भारत–दक्षिण कोरिया रक्षा सहयोग 2005, 2010 और 2020 में हस्ताक्षरित MoUs द्वारा निर्देशित है, जो उद्योग, लॉजिस्टिक्स, अनुसंधान एवं विकास तथा रक्षा औद्योगिक रोडमैप को कवर करते हैं।
- हालिया सहयोग में 2025 का DRDO–सियोल नेशनल यूनिवर्सिटी समझौता शामिल है, जो उच्च-शक्ति माइक्रोवेव सिस्टम विकसित करने पर केंद्रित है।
- K9 Vajra-T कार्यक्रम ‘मेक इन इंडिया’ पहल के अंतर्गत विकसित हुआ और भारत–दक्षिण कोरिया रक्षा सहयोग का प्रमुख परियोजना बना।
- पनडुब्बी सहयोग भी एक प्रमुख क्षेत्र है, जिसमें दक्षिण कोरिया की पारंपरिक पनडुब्बियों, लिथियम-आयन बैटरी प्रणालियों और एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन तकनीकों की विशेषज्ञता शामिल है।
- सांस्कृतिक संबंध: भारत और दक्षिण कोरिया के प्राचीन सांस्कृतिक संबंध हैं।
- कोरियाई ग्रंथ सामगुक युसा में उल्लेख है कि अयोध्या की राजकुमारी सुरीरत्ना 48 ईस्वी में कोरिया गईं और राजा किम सुरो से विवाह कर रानी ह्यो ह्वांग-ओक बनीं। अनेक कोरियाई लोग अपनी वंशावली उनसे जोड़ते हैं।
- कुछ विद्वान बौद्ध धर्म के कोरिया में प्रसार को भी उनके परिवार से जोड़ते हैं।
- रवीन्द्रनाथ टैगोर की कविता “लैम्प ऑफ द ईस्ट” (1929) कोरिया की सांस्कृतिक भावना को उजागर करती है और वर्तमान में भी कोरिया में लोकप्रिय है।
- सांस्कृतिक सहयोग सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम (2018) और ऑडियो-विज़ुअल सह-निर्माण समझौता (2015) जैसे समझौतों द्वारा समर्थित है।
- जन-से-जन संपर्क: दक्षिण कोरिया में भारतीय समुदाय लगभग 18,000 है, जिसमें छात्र, शोधकर्ता और पेशेवर शामिल हैं।
- बड़ी संख्या में भारतीय छात्र कोरियाई विश्वविद्यालयों में विशेषकर STEM क्षेत्रों में स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट स्तर पर अध्ययनरत हैं।
- भारतीय प्रवासी समूह सामुदायिक कल्याण और सांस्कृतिक सहभागिता को बढ़ावा देने में सक्रिय हैं।
नवीनतम विकास
- भारत और दक्षिण कोरिया ने राष्ट्रपति ली जे म्युंग की दिल्ली यात्रा के दौरान व्यापार, प्रौद्योगिकी एवं रणनीतिक सहयोग को गहरा करने पर सहमति व्यक्त की।
- दोनों पक्षों ने दशक के अंत तक द्विपक्षीय व्यापार को $50 बिलियन तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा और विशेष रणनीतिक साझेदारी की दृष्टि प्रस्तुत की।
- जहाज निर्माण, समुद्री लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता पर ढाँचे लॉन्च किए गए।
- 15 MoUs पर हस्ताक्षर हुए और क्वांटम कंप्यूटिंग व क्रिटिकल मिनरल्स जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग पर बल दिया गया।
साझेदारी का महत्व
- इंडो-पैसिफिक में संतुलन: भारत–दक्षिण कोरिया संबंध चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में संतुलन बनाए रखने के लिए महत्त्वपूर्ण हैं।
- आर्थिक परस्पर निर्भरता:
- भारत: विशाल बाज़ार, आईटी सेवाएँ और कुशल श्रम।
- दक्षिण कोरिया: उन्नत विनिर्माण, प्रौद्योगिकी और पूँजी।
- दोनों मिलकर परस्पर वृद्धि और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देते हैं।
- रक्षा विविधीकरण: भारत–दक्षिण कोरिया रक्षा संबंध नवाचार-आधारित सहयोग की ओर बढ़ रहे हैं, जिसमें स्टार्टअप्स, अनुसंधान संस्थान और संयुक्त प्लेटफ़ॉर्म शामिल हैं।
- भारत पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करता है, जबकि दक्षिण कोरिया निर्यात और सह-उत्पादन अवसरों का विस्तार करता है।
- सैन्य आदान-प्रदान और अभ्यास विश्वास को गहरा कर रहे हैं।
चुनौतियाँ
- व्यापार असंतुलन: भारत का दक्षिण कोरिया के साथ व्यापार घाटा बड़ा है और भारतीय निर्यात को गैर-शुल्कीय बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
- CEPA उन्नयन में विलंब: CEPA को आधुनिक बनाने की वार्ताएँ विलंबित रही हैं।
- भूराजनीतिक दबाव: चीन और अमेरिका के साथ संतुलन साधने की आवश्यकता भारत–दक्षिण कोरिया रणनीतिक संरेखण को सीमित कर सकती है।
निष्कर्ष और आगे की राह
- भारत–दक्षिण कोरिया संबंध व्यापार-केंद्रित साझेदारी से विकसित होकर एक व्यापक रणनीतिक और तकनीकी गठबंधन बन रहे हैं।
- यह संबंध इंडो-पैसिफिक स्थिरता, उन्नत विनिर्माण और रक्षा सहयोग पर आधारित है।
- भविष्य में साझेदारी को केवल रक्षा-औद्योगिक सहयोग तक सीमित न रखकर व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदलना चाहिए।
- साझा सुरक्षा, बेहतर बाज़ार पहुँच, निवेश, उच्च-प्रौद्योगिकी और रक्षा सहयोग, तथा सुदृढ़ जन-से-जन संबंधों पर बल देकर इसे एशिया में एक “भविष्यवादी साझेदारी” के रूप में विकसित किया जा सकता है।
स्रोत :TH
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